राजस्थान में बारिश ने रचा नया इतिहास,108 साल बाद पहली बार आसमां से गिरा इतना पानी, जानें पुराना रिकॉर्ड?
Rajasthan Rain : राजस्थान में 108 साल बाद इस बार जबर्दस्त बारिश हुई। राजस्थान में इस बार 10 सितंबर तक 704.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है. यह औसत से 71 फीसदी अधिक है. मरुधरा में इससे पहले 1917 में सर्वाधिक 844.2 मिमी बारिश हुई थी. यह अब तक की सर्वाधिक बारिश थी
जयपुर. जलवायु परिवर्तन अब किताबों तक सीमित नहीं है बल्कि उसका असर सीधे आंखों के सामने दिखने लगा है. इसका सबसे बड़ा उदाहरण इस बार राजस्थान में दिखा है. यहां मानसून की बारिश ने 108 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है. राजस्थान को अक्सर सूखा और कम बारिश वाला प्रदेश कहा जाता है. लेकिन इस बार राजस्थान इतिहास की दूसरी सबसे भारी बरसात का गवाह बना है. राजस्थान में मानसून 2025 में अब तक (10 सितंबर) 704.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है. यह औसत से 71 फीसदी अधिक है. राजस्थान में इससे पहले 1917 में सर्वाधिक 844.2 मिमी बारिश हुई थी. यह अब तक की सर्वाधिक बारिश थी. इस बार राजस्थान में अब तक 704.6 मिमी बारिश हो चुकी है. यह बीते 108 साल में अब तक दर्ज बारिश में दूसरी सबसे बड़ी बारिश है.
राजस्थान में 1917 के बाद साल 2025 में पहली बार राजस्थान ने ऐसा मानसून देखा जिसने एक सदी पुराने इतिहास की याद दिला दी. मौसम विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब राजस्थान की तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है. राजस्थान में अब तक की सर्वाधिक बारिश 844.2 एमएम 1917 में दर्ज की गई थी. इससे पहले 1908 में राजस्थान में 682.2 मिमी बारिश हुई थी. 1917 के बाद 1975 में भी 665 एमएम पानी गिरा था. लेकिन यह रिकॉर्ड बीते साल 2024 में टूट गया था. 2024 में 678.4 मिमी बारिश हुई थी. यह औसत से 56 फीसदी ज्यादा थी. लेकिन इस बार बारिश ने एक सदी पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है.
यह सब जलवायु परिवर्तन का असर है
जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा मानते हैं कि यह सब जलवायु परिवर्तन का असर है. पिछले दो वर्षों में लगातार बारिश के रिकॉर्ड टूटना साफ संकेत है कि राजस्थान में मानसून का चेहरा स्थायी रूप से बदल रहा है. राजस्थान में मानसून अब 8-10 दिन पहले दस्तक दे रहा है. विदाई में भी 1-2 हफ्ते की देरी हो रही है. पूर्वोत्तर और बिहार जैसे राज्यों में बारिश घट रही है जबकि राजस्थान जैसे कम वर्षा वाले राज्यों में बारिश बढ़ रही है
जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा मानते हैं कि यह सब जलवायु परिवर्तन का असर है. पिछले दो वर्षों में लगातार बारिश के रिकॉर्ड टूटना साफ संकेत है कि राजस्थान में मानसून का चेहरा स्थायी रूप से बदल रहा है. राजस्थान में मानसून अब 8-10 दिन पहले दस्तक दे रहा है. विदाई में भी 1-2 हफ्ते की देरी हो रही है. पूर्वोत्तर और बिहार जैसे राज्यों में बारिश घट रही है जबकि राजस्थान जैसे कम वर्षा वाले राज्यों में बारिश बढ़ रही है
बांधों की कहानी
इस बार बारिश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजस्थान के अधिकांश बांध जुलाई में ही ओवरफ्लो हो गए थे. इतना ही नहीं इस बार बारिश इस कदर हुई कि कुछ बांधों को 5-6 बार दोबारा भरा जा सकता था. विशेषज्ञों का कहना है कि अब प्रदेश को अपनी वॉटर स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाने पर गंभीरता से सोचना होगा. कभी रेगिस्तान कहलाने वाला राजस्थान अब धीरे-धीरे बारिश की नई पहचान बना रहा है. बीते कुछ वर्षों में लगातार रिकॉर्ड टूटना इसकी गवाही देता है.
इस बार बारिश का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राजस्थान के अधिकांश बांध जुलाई में ही ओवरफ्लो हो गए थे. इतना ही नहीं इस बार बारिश इस कदर हुई कि कुछ बांधों को 5-6 बार दोबारा भरा जा सकता था. विशेषज्ञों का कहना है कि अब प्रदेश को अपनी वॉटर स्टोरेज कैपेसिटी बढ़ाने पर गंभीरता से सोचना होगा. कभी रेगिस्तान कहलाने वाला राजस्थान अब धीरे-धीरे बारिश की नई पहचान बना रहा है. बीते कुछ वर्षों में लगातार रिकॉर्ड टूटना इसकी गवाही देता है.
सबसे ज्यादा बारिश वाले जिले
बारां जिला: 1582 मिमी (पूर्वी राजस्थान में टॉप पर)
पाली जिला: 800 मिमी से अधिक (दक्षिणी राजस्थान में टॉप पर)
बारां जिला: 1582 मिमी (पूर्वी राजस्थान में टॉप पर)
पाली जिला: 800 मिमी से अधिक (दक्षिणी राजस्थान में टॉप पर)
2025 की बारिश का स्केल
सामान्य बारिश 10 सितंबर तक : 405.9 मिमी
वास्तविक बारिश : 704.6 मिमी
औसत से अधिक : 298.7 मिमी (71% ज्यादा)
सामान्य बारिश 10 सितंबर तक : 405.9 मिमी
वास्तविक बारिश : 704.6 मिमी
औसत से अधिक : 298.7 मिमी (71% ज्यादा)
राजस्थान में अब मानसून का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है
सदी पुराने रिकॉर्ड का टूटना यह बताने के लिए काफी है कि अब मानसून का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है. राजस्थान को जहां पहले कभी पानी की बूंदों के लिए तरसना पड़ता था वहीं आज बाढ़ और ओवरफ्लो होते बांध इसकी नई तस्वीर दिखा रहे हैं. सवाल यह है कि क्या राजस्थान बरसात की इस बदली हुई को अवसर में बदलकर भविष्य की पानी जरूरतों को पूरा कर पाएगा?
सदी पुराने रिकॉर्ड का टूटना यह बताने के लिए काफी है कि अब मानसून का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है. राजस्थान को जहां पहले कभी पानी की बूंदों के लिए तरसना पड़ता था वहीं आज बाढ़ और ओवरफ्लो होते बांध इसकी नई तस्वीर दिखा रहे हैं. सवाल यह है कि क्या राजस्थान बरसात की इस बदली हुई को अवसर में बदलकर भविष्य की पानी जरूरतों को पूरा कर पाएगा?
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