धर्मेंद्र की खूबसूरत हसीना जिसके प्लेन को नेपाल की सुशीला कार्की के पति ने किया था हाईजैक, 30 लाख का था खेल
नेपाल हिंसा के बीच सुशीला कार्की अंतरिम प्रमुख बनीं, 1973 में माला सिन्हा समेत 19 यात्रियों वाला प्लेन दुर्गा प्रसाद सुबेदी ने 30 लाख के लिए हाईजैक किया था.
नई दिल्ली. नेपाल हिंसा के बीच जो एक नाम सबसे ज्यादा चर्चाओं में आया वो नाम है सुशीला कार्की … नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के गायब होने के बाद सुशीला कार्की का नाम नेपाल के अंतरिम प्रमुख के रूप में सामने आया. 11 जुलाई 2016 को नेपाल की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनीं सुशीला ने अपने एक साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ साहसी फैसले सुनाए, जिससे वह देश की नन्हें-मुन्नों की नजर में एक नायिका बन गईं. लेकिन इसे विडंबना नहीं तो और क्या कहेंगे कि वह उन्हीं की पत्नी हैं, जो 1973 में प्लेन हाईजैक में शामिल थे और इस प्लेन में बॉलीवुड की खूबसूरत एक्ट्रेस माला सिन्हा सवार थीं.
माला सिन्हा हिंदी सिनेमा की जानी मानी और खूबसूरत एक्ट्रेस में से एक रही हैं. उनकी एक्टिंग लोग आज भी लोगों के जहन में बसी है. मोहक मुस्कान ने ना जाने कितने लोगों को दीवाना बना दिया था. अपने करियर में उन्होंने तकरीबन हर एक्टर के साथ काम किया था. धर्मेंद्र, देवानंद और राज कपूर के साथ उन्होंने कई हिट फिल्में दी.
माला सिन्हा भी थीं प्लेन में सवार
बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा माला सिन्हा, जिन्हें पर्दे पर धर्मेंद्र की सबसे खूबसूरत जोड़ीदारों में गिना जाता है. कभी एक ऐसी घटना से गुजरीं थीं जो किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी. साल था 1973 और जगह थी नेपाल. रॉयल नेपाल एयरलाइंस का विमान बिराटनगर से काठमांडू जा रहा था, जिसमें माला सिन्हा भी सवार थीं. अचानक इस विमान को हाईजैक कर लिया गया. दिलचस्प बात यह थी कि इस हाईजैकिंग के पीछे कोई आतंकी नहीं, बल्कि नेपाली कांग्रेस के युवा नेता दुर्गा प्रसाद सुबेदी थे.
19 यात्री थे प्लेन में सवार
दरअसल, 10 जून, 1973 को, विराटनगर से काठमांडू जाते समय रॉयल नेपाल एयरलाइंस के एक प्लेन को हाइजैक कर लिया गया था. इस विमान में सवार 19 यात्री सवार थे. इन 19 यात्रियों में एक्ट्रेस माला सिन्हा भी शामिल थीं. इस हाईजैकिंग ने न सिर्फ नेपाल की राजनीति बल्कि बॉलीवुड की दुनिया में भी सनसनी फैला दी थी.
30 लाख के लिए था पूरा कांड
हाइजैक का मुख्य कारण वो 30 लाख रुपये थे, जो बिराटनगर के बैंकों से ले जाए जा रहे थे. यह हाइजैक तत्कालीन प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के नेतृत्व में हुआ था, जो राजशाही के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष के लिए धन जुटाना चाहते थे. विमान को बिहार के फोर्ब्सगंज में उतारा गया और पैसों को कार से दार्जिलिंग ले जाया गया. सुबेदी और दूसरे अपहरणकर्ताओं को बाद में मुंबई में गिरफ्तार किया गया और 1975 में आपातकाल के दौरान रिहा किया गया.
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