नेपाल आर्मी चीफ अचानक क्यों पहुंचे राष्ट्रपति भवन? मची खलबली, राजशाही की वापसी पर कौन डर रहा, समझें

 

नेपाल आर्मी चीफ अचानक क्यों पहुंचे राष्ट्रपति भवन? मची खलबली, राजशाही की वापसी पर कौन डर रहा, समझें




नेपाल में अंतरिम सरकार नहीं बनी, सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल ने शीतल निवास का दौरा किया. सुशीला कार्की के नेतृत्व में चर्चा जारी, BNA ने राजशाही वापसी की साजिश का आरोप लगाया.

नेपाल में अभी भी अंतरिम सरकार नहीं बन सकी है. सेना प्रमुख अशोक राज सिगडेल ने शुक्रवार को राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास शीतल निवास का दौरा किया. देश की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनाने के लिए चर्चा तेज है. लेकिन इस बीच राजशाही की वापसी को लेकर भी चर्चा तेज है. नेपाल में एक नागरिक संगठन ने सनसनीखेज आरोप लगाया है कि देश में फिर से राजशाही की वापसी की साजिश रची जा रही है. संगठन का कहना है कि केपी शर्मा ओली सरकार के पतन के बाद जब संक्रमणकालीन सरकार को लेकर बातचीत चल रही है, उसी बीच सेना की दखलंदाजी से ये खेल रचा जा रहा है. ‘बृहत नागरिक आंदोलन’ (BNA) ने गुरुवार को बयान जारी कर साफ कहा कि मंगलवार से देशभर में सुरक्षा की कमान सेना को मिलने के बाद उसकी बढ़ती ताकत चिंता का सबब है.

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Gen-Z आंदोलन राजशाही के लिए नहीं था

दूसरी ओर, नेपाली पोर्टल ‘माई रिपब्लिका’ की रिपोर्ट ने साजिश के आरोपों को और गंभीर बना दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन का दावा है कि Gen-Z आंदोलन में मारे गए युवाओं की शहादत को बहाना बनाकर, सेना की मध्यस्थता से राजशाही लाने, धर्मनिरपेक्षता और संघवाद जैसी व्यवस्थाओं को खत्म करने की चाल चली जा रही है. संगठन ने इसे ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ बताया और दो टूक कहा कि जनता का आंदोलन कभी भी गणराज्य और धर्मनिरपेक्षता को उलटने या सेना को संविधान से बाहर ताकत देने के लिए नहीं था. बीएनए के बयान में कहा गया, ‘वक्त की मांग है कि… Gen-Z आंदोलन को मिली सफलता के आगे का मार्ग राष्ट्रपति के मार्गदर्शन में तैयार किया जाए.’
संगठन ने कहा कि कोई भी नयी नागरिक सरकार संविधान का पूरी तरह से पालन करने वाली हो, उसे भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का विरोध करने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ‘इसके भीतर प्रति’क्रांतिकारियों के लिए कोई जगह नहीं होगी
नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के विरोध में ‘Gen Z’ के बैनर तले स्कूली छात्रों समेत हजारों युवाओं ने प्रतिबंध को तुरंत हटाने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ आंदोलन छेड़ा. सोशल मीडिया पर लगा प्रतिबंध तो हटा लिया गया लेकिन ‘Gen-Z’ के आंदोलन के बाद हिमालयी देश में सियासी उथल’पुथल शुरु हो गई. प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद फिलहाल देश की कमान सेना के हाथों में है.
जेनरेशन Z वह बच्चे हैं, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है. इन 15 साल के बीच जो बच्चे पैदा हुए हैं, उन्हें जेन Z कहा जाता है. साल 2025 तक यह पीढ़ी दुनिया की करीब 30 फीसदी वर्कफोर्स बन चुकी है और अपनी अलग सोच से समाज और व्यवस्था दोनों पर असर डाल रही है
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