इस महीने से शुरू होगा जमीन का ग्राउंड सर्वे, इन लोगों को मिली बड़ी राहत Bihar Land Survey
Bihar Land Survey: बिहार राज्य में भूमि सुधार और जमीन विवादों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे व्यापक भूमि सर्वेक्षण अभियान से लाखों परिवारों को फायदा होने की संभावना है। यह अभियान न केवल भूमि रिकॉर्ड्स में पारदर्शिता लाएगा बल्कि दशकों पुराने जमीन विवादों का समाधान भी करेगा।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट डिजिटल इंडिया के सपने को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। इस व्यापक सर्वेक्षण के माध्यम से प्रत्येक जमीन मालिक को सही और वैध दस्तावेज प्राप्त होंगे, जो उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
सर्वेक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य
बिहार सरकार के इस भूमि सर्वेक्षण अभियान का प्राथमिक लक्ष्य राज्य की भूमि व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाना है। इस योजना के तहत डिजिटाइज्ड जमाबंदियों में मौजूद त्रुटियों का सुधार किया जा रहा है और उन सभी भूमि अभिलेखों को ऑनलाइन पंजीकृत किया जा रहा है जो पहले छूट गए थे। यह पहल किसानों और जमींदारों के लिए एक वरदान साबित हो रही है।
राजस्व विभाग का यह निर्णय उत्तराधिकार नामांतरण और संयुक्त संपत्तियों के बंटवारे की समस्या को हल करने में भी सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर के कर्मचारियों के माध्यम से यह कार्य सुचारू रूप से संपन्न हो रहा है। इससे लोगों को अपने घर बैठे ही सभी आवश्यक सेवाएं मिल रही हैं और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की आवश्यकता कम हो गई है।
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सर्वेक्षण की कार्य प्रक्रिया और पद्धति
भूमि सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली को बेहद सुव्यवस्थित तरीके से डिज़ाइन किया गया है। सर्वेक्षण टीमें घर-घर जाकर जमाबंदी की प्रतियां वितरित कर रही हैं और आवश्यक आवेदन प्रपत्र भी उपलब्ध करा रही हैं। स्थानीय स्तर पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं जहां अमीन, राजस्व कर्मचारी और पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहकर लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान कर रहे हैं।
जमाबंदी में कोई त्रुटि मिलने पर OTP आधारित रजिस्ट्रेशन सिस्टम के जरिए शिकायत दर्ज की जा सकती है। यह शिकायत सीधे अंचल कार्यालय में पहुंचती है और इसका निष्पादन प्राथमिकता के आधार पर किया जाता है। आवेदकों को खतियान, स्व-घोषणा पत्र, और वंशावली जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज ऑनलाइन सबमिट करने की सुविधा भी दी गई है।
नागरिकों को मिलने वाली विशेष राहत
बिहार सरकार ने उन परिवारों की समस्याओं को समझते हुए जिनके पास पूर्वजों के पुराने प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हैं, कई राहत भरे फैसले लिए हैं। सरपंच के सत्यापन से वंशावली प्रमाणपत्र को मान्यता दी गई है और जनप्रतिनिधियों के प्रमाणन से मृत्यु प्रमाणपत्र को भी वैध माना जा रहा है। यह निर्णय उन हजारों परिवारों के लिए राहत की सांस साबित हो रहा है जो दस्तावेजों की कमी के कारण सर्वे प्रक्रिया से बाहर रह जाते।
इस लचीली नीति से गरीब और वंचित परिवार भी सर्वेक्षण में भाग ले सकते हैं और अपने भूमि अधिकारों को सुरक्षित कर सकते हैं। सरकार का यह दृष्टिकोण सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित है। प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के अपनी जमीन का वैध दस्तावेज प्राप्त करने का अधिकार है।
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डिजिटल आवेदन प्रक्रिया की सुविधा
आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए बिहार सरकार ने ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को अत्यंत सरल बनाया है। भूमि मालिक सर्वे पोर्टल पर जाकर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पता और जमीन का विवरण आसानी से भर सकते हैं। 3MB से कम साइज के स्कैन किए गए दस्तावेजों को अपलोड करना भी बेहद आसान हो गया है।
OTP वेरीफिकेशन के बाद आवेदन सफलतापूर्वक सबमिट हो जाता है और आवेदकों को एक स्लिप प्रिंट करने की सुविधा मिलती है। यह डिजिटल पहल समय की बचत करती है और पारदर्शिता सुनिश्चित करती है। तकनीकी समस्याओं के लिए हेल्पडेस्क की व्यवस्था भी की गई है जो 24×7 उपलब्ध है।
अभियान का व्यापक प्रभाव और परिणाम
यह महत्वाकांक्षी अभियान बिहार के 45,000 राजस्व गांवों को कवर कर रहा है और लगभग 4.5 करोड़ ऑनलाइन जमाबंदी प्रपत्र घर-घर पहुंचाए जा रहे हैं। इस व्यापक पहुंच से राज्य के प्रत्येक कोने में रहने वाले भूमि मालिकों को सीधा फायदा मिल रहा है। सरकारी दफ्तरों में होने वाली अनावश्यक भीड़भाड़ कम हो गई है और लोगों का समय बच रहा है।
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भूमि विवादों में काफी कमी आई है। पारदर्शी रिकॉर्ड सिस्टम के कारण धोखाधड़ी की घटनाएं घट रही हैं और लोगों का सरकारी व्यवस्था पर भरोसा बढ़ रहा है। यह अभियान बिहार के भविष्य के विकास में एक मजबूत आधार तैयार कर रहा है।
बिहार सरकार का यह भूमि सर्वेक्षण अभियान राज्य के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह न केवल भूमि संबंधी समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान करता है बल्कि डिजिटल पारदर्शिता और सुशासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी है। इस पहल से प्रत्येक परिवार को अपनी जमीन का सुरक्षित, कानूनी और डिजिटल प्रमाण मिलेगा जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अमूल्य संपत्ति साबित होगा।
disclaimer- यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। सरकारी योजनाओं और नीतियों में समय-समय पर बदलाव होते रहते हैं। किसी भी आवेदन या प्रक्रिया से पहले संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से सत्यापित जानकारी प्राप्त करें। लेखक इस लेख में दी गई जानकारी की पूर्ण सटीकता की जिम्मेदारी नहीं लेता है।
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